Header Ads

शिवाजी महाराज की छापामार युद्ध प्रणाली (gorilla war)

शिवाजी महाराज की छापामार युद्ध प्रणाली : 
शिवाजी महाराज की छापामार युद्ध प्रणाली (gorilla war)
शिवाजी महाराज

       शिवाजी महाराज के सभी शत्रु बलवान थे । शत्रुओं के पास विशाल सेना थी , सैकड़ों तोपें थीं लेकिन शिवाजी महाराज की सेना कम थी । यह छोटी - सी सेना शत्रु की विशाल सेना से कैसे लड़ती ? यह खुले मैदान में शत्रु से कैसे मुकाबला करती ? तब शिवाजी महाराज ने सोचा कि महाराष्ट्र पहाड़ी प्रदेश है । यहाँ पहाड़ियाँ , घाटियाँ और दें बहुत हैं । उनका हमें उपयोग करना चहिए । इन सारी बातों को ध्यान में रखकर शिवाजी महाराज ने शत्रु का सामना कैसे करना चाहिए यह निश्चित किया । शत्रु के घुड़सवारों के पास बहुत सामग्री होती थी । वह सब इकट्ठा करके युद्ध पर जाने में उन्हें देर लगती थी । इसके विपरीत मराठा घुड़सवारों के पास भारी सामान नहीं होता था । पीठ पर ढाल , कमर में तलवार और हाथ में भाला बस इतनी ही उनकी सामग्री होती थी ।
        देखते - ही - देखते मराठा घुड़सवार पहाड़ पर चढ़ते थे और फिर उतर आते थे । शिवाजी महाराज के मावले फुर्तीले और जीवट थे । इन सारी बातों का विचार करके शिवाजी महाराज जहाँ तक हो सके शत्रु के साथ खुले मैदान में लड़ना टालते थे । इसमें उनकी कूटनीति दिखाई देती है ।
          शत्रु के डेरे में गुप्त रूप से अपने आदमी भेजकर शिवाजी महाराज शत्रु पक्ष की पूरी जानकारी ले लेते थे । फिर शत्रु पर अचानक हमला करते थे । असावधान शत्रु को तितर - बितर कर देते थे । शत्रु लड़ने के लिए तैयार हो , इससे पहले ही तूफान की तरह आँखों से ओझल हो जाते थे । पहाड़ी प्रदेशों में इस प्रकार लुकछिप कर युद्ध करने का प्रारंभ शिवाजी महाराज ने ही किया । इसे ही छापामार युद्ध प्रणाली  (gorilla war) कहते हैं । शिवाजी महाराज ने छापामार युद्ध प्रणाली से ही बादशाह की विशाल फौज की धज्जियाँ उड़ा दीं ।

शिवाजी महाराज की छापामार युद्ध प्रणाली -पहाड़ी किले :

        पहाड़ी किलों पर शिवाजी महाराज का अधिक विश्वास था । किला कब्जे में आने पर आसपास के प्रदेशों पर अधिकार करना सरल होता था । किले में रसद और गोला - बारूद अधिक मात्रा में जमा करने से काम बन जाता था । ऐसे किलों में शिवाजी महाराज की छोटी सी सेना भी शत्रु की विशाल सेना को दो - दो वर्षों तक उलझाए रखती थी
       शत्रु शक्तिशाली होने पर वे ऐसे किलों का आश्रय ले सकते थे । शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की राजधानी खुले मैदान पर स्थित किसी शहर में नहीं रखी । उन्होंने स्वराज्य की राजधानी पहले राजगढ़ में रखी और फिर इसके लिए रायगढ़ को चुना ; इसके पीछे यही रहस्य था ।
शिवाजी महाराज की छापामार युद्ध प्रणाली (gorilla war)
शिवाजी महाराज

 शिवाजी महाराज की छापामार युद्ध प्रणाली- नौसेना  :

       शिवाजी ने जान लिया था कि सिद्दी , पुर्तगाली और अंग्रेजों से स्वराज्य को खतरा हो सकता है । इसलिए उन्होंने दूरदृष्टि रखकर नौसेना स्थापित की । समुद्र में सिंधुदुर्ग और विजयदुर्ग जैसे सुदृढ़ सागरीय किले बनवाए । उन्हें देखने पर आज भी हम दंग रह जाते हैं । स्वराज्य पर कितने ही संकट आए परंतु शिवाजी महाराज ने बड़ी वीरता और कूटनीति से उनका सामना किया । इसलिए स्वराज्य का निर्माण संभव हुआ ।
        दोस्तों अगर आपको यह पोस्ट (शिवाजी महाराज की छापामार युद्ध प्रणाली) पसंद आए तो अपने दोस्तों के साथ  जरूर  शेयर करें 
      धन्यवाद।।।
                      ।।।।।।जय हिंद वन्दे मातरम।।।।।।

No comments

Note: only a member of this blog may post a comment.

Powered by Blogger.