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शिवाजी महाराज हिंदी

 शिवाजी महाराज - प्रेरणा का स्रोत 

शिवाजी महाराज
"छत्रपती शिवाजी महाराज"

     प्रेरणादायी चरित्र : 

शिवाजी महाराज ने शून्य से स्वराज्य का निर्माण किया और असंभव को संभव कर दिखाया । इसलिए ऐसा लगता है कि शिवाजी महाराज का चरित्र बार - बार सुनें और सुनाएँ । उनके चरित्र से हमें प्रेरणा मिलती है ।

मातृ - पितृ भक्ति :

        शिवाजी महाराज सदैव अपनी माँसाहेब की आज्ञा में रहे । माँसाहेब की सभी इच्छाएँ उन्होंने पूरी कीं । शहाजीराजे के बारे में उनके मन में असीम श्रद्धा थी । एक बार शहाजीराजे उनसे मिलने आए । शिवाजी महाराज को बड़ी खुशी हुई । उन्होंने पिताजी को पालकी में बिठाया । उनके जूते अपने हाथ में लेकर वे पालकी के साथ चलने लगे । कितनी बड़ी थी यह पितृ भक्ति ! शहाजीराजे और जिजामाता इन महान माता - पिता का हिंदवी स्वराज्य का सपना शिवाजी महाराज ने पूरा किया ।
शिवाजी महाराज
"छत्रपती शिवाजी महाराज"

साधु - संतों का आदर : 

        शिवाजी महाराज की कुलदेवी भवानी माता थीं । उनपर शिवाजी महाराज की बहुत श्रद्धा थी । वे साधु - संतों को बड़ा सम्मान देते थे । उन्हें मंदिर बहत प्रिय थे । उन्होंने मसजिदों की भी रक्षा की । उन्हें भगवद्गीता पूज्य थी । उन्होंने कुरआन शरीफ का भी सम्मान किया । ईसाइयों के गिरजाघरों का भी वे आदर करते थे । शिवाजी महाराज विद्वानों का सम्मान करते थे । परमानंद , गागाभट्ट , धुंडिराज , भूषण आदि विद्वानों का उन्होंने सम्मान किया । उसी प्रकार संत तुकाराम , समर्थ रामदास , बाबा याकुब , मौनीबाबा आदि संतों का उन्होंने बहुत आदर किया । सज्जनों की रक्षा करना और दुर्जनों का संहार करना शिवाजी महाराज की यह प्रतिज्ञा थी जिसका उन्होंने जीवनभर निर्वाह किया ।

 स्वदेशाभिमान : 

          शिवाजी महाराज एक जागीरदार के बेटे थे । उन्हें धन - दौलत की कमी नहीं थी लेकिन बचपन में ही वे गुलामी से ऊब गए थे । अपने देश में अपना राज्य हो ; प्रत्येक को अपने धर्म के अनुसार जीने का अवसर मिले ; सभी सुख - संतोष से रहें ; मराठी भाषा और स्वधर्म को सम्मान मिले इनके लिए शिवाजी महाराज ने शक्तिशाली शत्रुओं का सामना करके स्वराज्य स्थापित किया । स्वदेश , स्वधर्म और स्वभाषा के उत्कर्ष के लिए वे जीवन भर कष्ट उठाते रहे और अंत में सफल हुए । उन्हें मातृभाषा के प्रति अभिमान था । राज्य के प्रशासन में मराठी शब्दों का प्रयोग हो , इसलिए उन्होंने ‘ राज व्यवहार कोश ' ग्रंथ का निर्माण करवाया ।
छत्रपती शिवाजी महाराज
"छत्रपती शिवाजी महाराज"

हिंदवी स्वराज्य : 

       हिंदवी स्वराज्य शिवाजी महाराज का सपना था । हिंदवी का अर्थ था हिंदुस्तान में रहनेवाले , चाहे वे किसी भी धर्म के हों या किसी भी जाति के हों । उनका राज्य अर्थात हिंदवी स्वराज्य । । शत्रु शक्तिशाली थे परंतु शिवाजी महाराज ने साहस नहीं छोड़ा । समय बहुत कठिन था परंतु उन्होंने स्वाभिमान का त्याग नहीं किया । बादशाह के पक्ष में लाखों लोग थे लेकिन शिवाजी महाराज ने हमेशा न्याय का पक्ष लिया । शक्तिशाली विदेशी सत्ता के सामने वे कभी नहीं झुके ।

 शिवाजी महाराज का स्मरणीय स्वरूप ;

         गहन अंधकार में अपनी दिशा निश्चित करके मार्ग निकालना , संकट आने पर भयभीत न होते हुए उनपर विजय प्राप्त करना और आगे बढ़ना , शक्तिशाली शत्रु के साथ अपनी अल्प शक्ति से लड़ते - लड़ते अपना सामर्थ्य बढ़ाते रहना ; साथियों को उत्साह देते हुए और शत्रुओं को चकमा देते हुए यश प्राप्त करना आदि सभी गुण शिवाजी महाराज में विद्यमान थे । आदर्श पुत्र , सजग नेता , कुशल संगठनकर्ता , जनकल्याण करनेवाला प्रशासक , बुधिमान युद्ध वीर , दुर्जनों के संहारक , सज्जनों के रक्षक और नवयुग का निर्माता जैसे शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व के कई तेजस्वी पहलू हैं । इन्हें देखने पर मन में बार - बार यही भाव उठता है कि :
" शिवाजी महाराज का याद करें रूप ।
 । शिवाजी महाराज का याद करें प्रताप । । "

छत्रपती शिवाजी महाराज
"छत्रपती शिवाजी महाराज"

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