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साहस और धैर्य का प्रतीक - Chhatrapati Shivaji Maharaj

साहस और शौर्य का प्रतिक- वीर शिवाजी महाराज :

साहस और शौर्य का प्रतिक- वीर शिवाजी महाराज
छत्रपति शिवाजी महाराज
शिवाजी महाराज का शौर्य तथा धैर्य :
        सिर्फ पंद्रह वर्ष की आयु में शिवाजी महाराज ने रायरेश्वर के मंदिर में स्वराज्य स्थापना की शपथ ली थी ।  ओर केवल पचास वर्ष की आयु में उन्होंने रायगढ़ पर अपने प्राण त्याग दिए । केवल पैंतीस वर्ष का समय था । इस कालखंड में शिवाजी महाराज ने अपने पराक्रम तथा कूटनीति के बल पर ' हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की । वे स्वराज्य के लिए जीवन भर युद्ध करते रहे । 
        अत्यंत कठिन समय में हाथ में तलवार लिए वे स्वयं युद्धभूमि में उतरे और विजय प्राप्त की । उनका जीवन युद्ध प्रसंगों से भरा हुआ है । स्वराज्य पर अनेक संकट आए लेकिन शिवाजी महाराज ने प्रसंग देखकर तथा दूरदृष्टि से विचार करके उनका सामना किया । शिवाजी महाराज जैसे पराक्रमी थे वैसे ही महान कूटनीतिज्ञ भी थे । जहाँ शक्ति का अभाव देखा , वहाँ उन्होंने युक्ति से काम लिया । 

छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में कुछ जानकारी
        
 अफजल खान बहुत ही शक्तिशाली वीर था लेकिन शिवाजी महाराज निर्भीकता से उससे मिलने गए और उसका काम तमाम कर दिया । मूसलाधार वर्षा तथा गहन अंधकार में शिवाजी महाराज सिद्दी जौहर के घेरे से बच निकले । रात के अंधेरे में शाइस्ता खान पर हमला करके उसे अच्छा सबक सिखाया । आगरा में औरंगजेब की कैद से वे बड़ी युक्ति से छुट आए । उनके समान साहसी और कटनीतिज्ञ सेनानायक मिलना कठिन है ।

शिवाजी महाराज का स्मरणीय स्वरूप :

        गहन अंधकार में अपनी दिशा निश्चित करके मार्ग निकालना , संकट आने पर भयभीत न होते हुए उनपर विजय प्राप्त करना और आगे बढ़ना , शक्तिशाली शत्रु के साथ अपनी अल्प शक्ति से लड़ते - लड़ते अपना सामर्थ्य बढ़ाते रहना ; साथियों को उत्साह देते हुए और शत्रुओं को चकमा देते हुए यश प्राप्त करना आदि सभी गुण शिवाजी महाराज में विद्यमान थे ।
         आदर्श पुत्र , सजग नेता , कुशल संगठनकर्ता , जनकल्याण करनेवाला प्रशासक , बुधिमान युद्ध वीर , दुर्जनों के संहारक , सज्जनों के रक्षक और नवयुग का निर्माता जैसे शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व के कई तेजस्वी पहलू हैं । इन्हें देखने पर मन में बार - बार यही भाव उठता है कि :
                  ‘ ‘ शिवाजी महाराज को याद करें रूप । 
                 शिवाजी महाराज का याद करें प्रताप । । '

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धन्यवाद।।
                  ।।।।।जय हिंद वंदे मातरम।।।।

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